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श्लोक 9.32.26-27h  |
स्वयमिष्टं च ते कामं वीर भूयो ददाम्यहम्॥ २६॥
हत्वैकं भवतो राज्यं हतो वा स्वर्गमाप्नुहि। |
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| अनुवाद |
| हे वीर! मैं स्वयं तुम्हें पुनः यह मनोवांछित वर देता हूँ कि 'यदि तुम हममें से किसी एक को भी मार दोगे तो सारा राज्य तुम्हारा हो जाएगा अथवा यदि तुम मारे जाओगे तो स्वर्ग को प्राप्त होगे।'॥26 1/2॥ |
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| Brave one! I myself once again grant you this desired boon that 'If you kill even one of us, the entire kingdom will be yours or if you are killed, you will attain heaven.'॥ 26 1/2॥ |
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