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mahabharat 9.32.23-24: युधिष्ठिर ने कहा- सुयोधन! यह सौभाग्य की बात है कि तुम क्षत्रिय धर्म को भी जानते हो। महाबाहो! मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि तुम अभी युद्ध करने का विचार कर रहे हो। कुरुपुत्र! तुम वीर योद्धा हो और युद्ध करना जानते हो- यह हर्ष और सौभाग्य की बात है।   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  9.32.23-24 
युधिष्ठिर उवाच
दिष्टॺा त्वमपि जानीषे क्षत्रधर्मं सुयोधन॥ २३॥
दिष्टॺा ते वर्तते बुद्धिर्युद्धायैव महाभुज।
दिष्टॺा शूरोऽसि कौरव्य दिष्टॺा जानासि संगरम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा- सुयोधन! यह सौभाग्य की बात है कि तुम क्षत्रिय धर्म को भी जानते हो। महाबाहो! मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि तुम अभी युद्ध करने का विचार कर रहे हो। कुरुपुत्र! तुम वीर योद्धा हो और युद्ध करना जानते हो- यह हर्ष और सौभाग्य की बात है।
 
Yudhishthira said- Suyodhan! It is a matter of good fortune that you also know the Kshatriya Dharma. Mahabaho! I am happy to know that you are thinking of fighting the war right now. Son of Kuru! You are a brave warrior and know how to fight- this is a matter of joy and good fortune.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)