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श्लोक 9.32.17  |
अहमुत्थाय सर्वान् वै प्रतियोत्स्यामि संयुगे।
अनुगम्यागतान् सर्वानृतून् संवत्सरो यथा॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| मैं उठकर युद्धभूमि में तुम सब से एक-एक करके युद्ध करूँगा, जैसे वर्ष एक-एक करके सब ऋतुओं को ग्रहण करता है॥17॥ |
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| I will get up and fight all of you on the battlefield, one by one, just as the year accepts all the seasons one by one.॥ 17॥ |
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