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mahabharat 9.32.16: ‘नरेश्वर! संतों की कीर्ति का मुख्य कारण धर्म है। उसी धर्म और कीर्ति का पालन करते हुए मैं यहाँ यह कह रहा हूँ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.32.16 
धर्ममूला सतां कीर्तिर्मनुष्याणां जनाधिप।
धर्मं चैवेह कीर्तिं च पालयन् प्रब्रवीम्यहम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘नरेश्वर! संतों की कीर्ति का मुख्य कारण धर्म है। उसी धर्म और कीर्ति का पालन करते हुए मैं यहाँ यह कह रहा हूँ॥16॥
 
‘Nareshwar! The main reason for the fame of saints is Dharma. I am saying this here while following that Dharma and fame.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)