Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.32.14-15: राजन्! मुझे आपसे, कुन्तीपुत्र भीमसेन से, अर्जुन से, श्रीकृष्ण से, अथवा पांचालों से कोई भय नहीं है। मैं नकुल-सहदेव, सात्यकि तथा आपके अन्य सैनिकों से भी नहीं डरता। जब आप युद्ध में क्रोध में होंगे, तब मैं ही आप सबको आगे बढ़ने से रोकूँगा।॥ 14-15॥ | mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे त्वत्तो भयं राजन् न च पार्थाद् वृकोदरात्।
फाल्गुनाद् वासुदेवाद् वा पञ्चालेभ्योऽथवा पुन:॥ १४॥
यमाभ्यां युयुधानाद् वा ये चान्ये तव सैनिका:।
एक: सर्वानहं क्रुद्धो वारयिष्ये युधि स्थित:॥ १५॥
अनुवाद
राजन्! मुझे आपसे, कुन्तीपुत्र भीमसेन से, अर्जुन से, श्रीकृष्ण से, अथवा पांचालों से कोई भय नहीं है। मैं नकुल-सहदेव, सात्यकि तथा आपके अन्य सैनिकों से भी नहीं डरता। जब आप युद्ध में क्रोध में होंगे, तब मैं ही आप सबको आगे बढ़ने से रोकूँगा।॥ 14-15॥
‘King! I have no fear of you, Kunti's son Bhimasena, Arjuna, Shri Krishna or the Panchalas. I am not even afraid of Nakul-Sahdev, Satyaki and your other soldiers. When you are in a state of anger in the battle, I alone will stop all of you from moving forward.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥