श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.32.10 
यूयं ससुहृद: पार्था: सर्वे सरथवाहना:।
अहमेक: परिद्यूनो विरथो हतवाहन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तुम सब पाण्डव अपने साथ अपने हितैषी मित्रों को भी लाए हो। तुम्हारे रथ और वाहन भी उपस्थित हैं। मैं अकेला, थका हुआ और रथ-वाहन विहीन हूँ॥10॥
 
All of you Pandavas have brought along with you your well-wishing friends. Your chariots and vehicles are also present. I am alone, tired and without a chariot and vehicle.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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