श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.32.1 
धृतराष्ट्र उवाच
एवं संतर्ज्यमानस्तु मम पुत्रो महीपति:।
प्रकृत्या मन्युमान् वीर: कथमासीत् परंतप:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! शत्रुओं को कष्ट देने वाला मेरा वीर पुत्र राजा दुर्योधन स्वभाव से ही क्रोधी था। जब युधिष्ठिर ने उसे इस प्रकार डाँटा, तब उसे क्या हुआ?॥1॥
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! My brave son, King Duryodhan, who used to torment the enemies, was short-tempered by nature. When Yudhishthira rebuked him in this manner, what happened to him?॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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