Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.31.65-66h: पहले तो तुम सुई के बराबर भी भूमि नहीं छोड़ते थे, अब सारी पृथ्वी को कैसे त्याग रहे हो? इतना ऐश्वर्य पाकर और इस जगत पर राज्य करके कौन मूर्ख अपनी भूमि शत्रु को देना चाहेगा?॥65 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूच्यग्रं नात्यज: पूर्वं स कथं त्यजसि क्षितिम्।
एवमैश्वर्यमासाद्य प्रशास्य पृथिवीमिमाम्॥ ६५॥
को हि मूढो व्यवस्येत शत्रोर्दातुं वसुन्धराम्।
अनुवाद
पहले तो तुम सुई के बराबर भी भूमि नहीं छोड़ते थे, अब सारी पृथ्वी को कैसे त्याग रहे हो? इतना ऐश्वर्य पाकर और इस जगत पर राज्य करके कौन मूर्ख अपनी भूमि शत्रु को देना चाहेगा?॥65 1/2॥
Earlier you were not leaving even a needle's tip of land, now how are you abandoning the entire earth? After getting such prosperity and ruling this world, which fool would want to give his land to the enemy?॥ 65 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥