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mahabharat 9.31.63-64: मुझे युद्ध में परास्त करके इस पृथ्वी पर राज्य करो। भारत! पहले तो तुम मुझे सुई चुभने जितना भी क्षेत्र नहीं देते थे। प्रजानाथ! फिर आज तुम मुझे सम्पूर्ण पृथ्वी क्यों दे रहे हो?॥ 63-64॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 63-64
 
 
श्लोक  9.31.63-64 
मां तु निर्जित्य संग्रामे पालयेमां वसुन्धराम्।
सूच्यग्रेणापि यद् भूमेरपि भिद्येत भारत॥ ६३॥
तन्मात्रमपि तन्मह्यं न ददाति पुरा भवान्।
स कथं पृथिवीमेतां प्रददासि विशाम्पते॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
मुझे युद्ध में परास्त करके इस पृथ्वी पर राज्य करो। भारत! पहले तो तुम मुझे सुई चुभने जितना भी क्षेत्र नहीं देते थे। प्रजानाथ! फिर आज तुम मुझे सम्पूर्ण पृथ्वी क्यों दे रहे हो?॥ 63-64॥
 
Defeat me in battle and rule this earth. Bharat! Earlier you were not giving me even an area as big as a needle could pierce. Prajanath! Then why are you giving me the whole earth today?॥ 63-64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)