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mahabharat 9.31.61-62: शत्रुओं से घिरा हुआ कौन राजा किसी को भूमि देने की इच्छा करेगा ? हे कौरवराज ! अब न तो आप किसी को भूमि दे सकते हैं और न बलपूर्वक छीन सकते हैं । ऐसी स्थिति में आपने भूमि देने की इच्छा कैसे की ?॥61-62॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 61-62
 
 
श्लोक  9.31.61-62 
अभियुक्तस्तु को राजा दातुमिच्छेद्धि मेदिनीम्॥ ६१॥
न त्वमद्य महीं दातुमीश: कौरवनन्दन।
आच्छेत्तुं वा बलाद् राजन् स कथं दातुमिच्छसि॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं से घिरा हुआ कौन राजा किसी को भूमि देने की इच्छा करेगा ? हे कौरवराज ! अब न तो आप किसी को भूमि दे सकते हैं और न बलपूर्वक छीन सकते हैं । ऐसी स्थिति में आपने भूमि देने की इच्छा कैसे की ?॥61-62॥
 
Which king who is surrounded by enemies would wish to give land to someone? O King of Kauravas! Now neither can you give land to anyone nor can you snatch it by force. In such a situation how did you wish to give land?॥ 61-62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)