श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  9.31.58 
त्वया दत्तां न चेच्छेयं पृथिवीमखिलामहम्।
त्वां तु युद्धे विनिर्जित्य भोक्तास्मि वसुधामिमाम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम मुझे यह सम्पूर्ण पृथ्वी भी दे दो, तो भी मैं इसे नहीं लेना चाहता। मैं तुम्हें युद्ध में हराकर ही इस पृथ्वी का उपभोग करूँगा ॥ 58॥
 
I do not wish to take even this entire earth if you offer it to me. I shall enjoy this earth only after defeating you in battle. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)