vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद
»
श्लोक 54
श्लोक
9.31.54
संजय उवाच
दुर्योधनं तव सुतं सलिलस्थं महायशा:।
श्रुत्वा तु करुणं वाक्यमभाषत युधिष्ठिर:॥ ५४॥
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! उन करुणामय वचनों को सुनकर महाबली युधिष्ठिर ने जल में स्थित आपके पुत्र दुर्योधन से इस प्रकार कहा॥54॥
Sanjay says- Rajan! The great Yudhishthira, hearing those compassionate words, said thus to your son Duryodhana, who was situated in the water. 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×