श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  9.31.53 
गच्छ त्वं भुङ्क्ष्व राजेन्द्र पृथिवीं निहतेश्वराम्।
हतयोधां नष्टरत्नां क्षीणवृत्तिर्यथासुखम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, जिस पृथ्वी का स्वामी नष्ट हो गया है, जिसके योद्धा मारे गए हैं और जिसके रत्न नष्ट हो गए हैं, उस पर जाकर सुखपूर्वक आनन्द से भोग करो; क्योंकि तुम्हारी जीविका नष्ट हो गई है ॥ 53॥
 
King, go and enjoy happily the earth whose lord has been destroyed, whose warriors have been slain and whose precious stones have been destroyed; for your livelihood has been cut short. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)