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mahabharat 9.31.51: हे राजन! यह पृथ्वी, जहाँ मेरे अधिकांश भाई, घोड़े और हाथी मारे गए हैं, अब आपके अधिकार में है। आप निश्चिंत होकर इसका उपभोग करें॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  9.31.51 
हतबान्धवभूयिष्ठा हताश्वा हतकुञ्जरा।
एषा ते पृथिवी राजन् भुङ्क्ष्वैनां विगतज्वर:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यह पृथ्वी, जहाँ मेरे अधिकांश भाई, घोड़े और हाथी मारे गए हैं, अब आपके अधिकार में है। आप निश्चिंत होकर इसका उपभोग करें॥ 51॥
 
O King! This earth, where most of my brothers, horses and elephants have been killed, is now in your possession. Enjoy it without any worries. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)