श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  9.31.40 
न प्राणहेतोर्न भयान्न विषादाद् विशाम्पते।
इदमम्भ: प्रविष्टोऽस्मि श्रमात् त्विदमनुष्ठितम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! मैं न तो प्राण बचाने के लिए, न भय से, न शोक से इस जल में उतरा हूँ। केवल थक जाने के कारण ही मैंने ऐसा किया है ॥40॥
 
O Prajanath! I have neither entered this water to save my life, nor out of fear, nor out of sadness. I have done so only because I was tired. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)