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mahabharat 9.31.4: "यह पानी रोककर सो रहा है। इसे यहाँ मनुष्यों का कोई भय नहीं है, क्योंकि यह अपनी दिव्य माया से पानी के अंदर निवास करता है।"   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.31.4 
विष्टभ्य सलिलं शेते नास्य मानुषतो भयम्।
दैवीं मायामिमां कृत्वा सलिलान्तर्गतो ह्ययम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
"यह पानी रोककर सो रहा है। इसे यहाँ मनुष्यों का कोई भय नहीं है, क्योंकि यह अपनी दिव्य माया से पानी के अंदर निवास करता है।"
 
‘It is sleeping after stopping the water. It has no fear of humans here because it resides inside the water using this divine illusion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)