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दुर्योधन उवाच
नैतच्चित्रं महाराज यद्भी: प्राणिनमाविशेत्।
न च प्राणभयाद् भीतो व्यपयातोऽस्मि भारत॥ ३८॥
अनुवाद
दुर्योधन बोला, 'महाराज! किसी भी प्राणी के मन में भय उत्पन्न हो जाए, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है; किन्तु हे भरतपुत्र! मैं अपने प्राणों के भय से भागकर यहाँ नहीं आया हूँ।'
Duryodhan said, 'Maharaj! It is not surprising that fear may enter the mind of any living being; but O son of Bharata! I have not come here fleeing in fear of my life.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥