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mahabharat 9.31.33-34: सुयोधन! तुम्हारा शौर्य कहाँ गया? तुम्हारा अभिमान कहाँ गया? तुम्हारा पराक्रम कहाँ गया? वह महान गर्जना और गर्जना कहाँ गई? और वह शस्त्र विद्या का ज्ञान कहाँ गया? इस समय तुम इस तालाब में कैसे सो रहे हो? भरत! उठो और क्षत्रिय धर्म के अनुसार युद्ध करो॥ 33-34॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.31.33-34 
क्व ते तत् पौरुषं यातं क्व च मान: सुयोधन।
क्व च विक्रान्तता याता क्व च विस्फूर्जितं महत्॥ ३३॥
क्व ते कृतास्त्रता याता किञ्च शेषे जलाशये।
स त्वमुत्तिष्ठ युध्यस्व क्षत्रधर्मेण भारत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
सुयोधन! तुम्हारा शौर्य कहाँ गया? तुम्हारा अभिमान कहाँ गया? तुम्हारा पराक्रम कहाँ गया? वह महान गर्जना और गर्जना कहाँ गई? और वह शस्त्र विद्या का ज्ञान कहाँ गया? इस समय तुम इस तालाब में कैसे सो रहे हो? भरत! उठो और क्षत्रिय धर्म के अनुसार युद्ध करो॥ 33-34॥
 
Suyodhana! Where has your bravery gone? Where is your pride? Where has your valour gone? Where is that great roar and roar? And where has that knowledge of the art of weapons gone? How are you sleeping in this pond at this time? Bharata! Get up and fight according to the kshatriya dharma.॥ 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)