Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.31.31-32: ‘तुम, कर्ण और सुबलपुत्र, जिन्होंने शकुनीक का आश्रय लेकर अपने को अमर मान लिया था और अपने को मनुष्य भी नहीं समझते थे, उस महान पाप को करके अब युद्ध क्यों नहीं करते? भरत! उठो और हमारे साथ युद्ध करो। तुम्हारे समान वीर पुरुष मोहवश पीठ दिखाकर भागना कैसे पसन्द कर सकते हैं?॥ 31-32॥ | mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत् तु कर्णमुपाश्रित्य शकुनिं चापि सौबलम्।
अमर्त्य इव सम्मोहात् त्वमात्मानं न बुद्धवान्॥ ३१॥
तत् पापं सुमहत् कृत्वा प्रतियुद्धॺस्व भारत।
कथं हि त्वद्विधो मोहाद् रोचयेत पलायनम्॥ ३२॥
अनुवाद
‘तुम, कर्ण और सुबलपुत्र, जिन्होंने शकुनीक का आश्रय लेकर अपने को अमर मान लिया था और अपने को मनुष्य भी नहीं समझते थे, उस महान पाप को करके अब युद्ध क्यों नहीं करते? भरत! उठो और हमारे साथ युद्ध करो। तुम्हारे समान वीर पुरुष मोहवश पीठ दिखाकर भागना कैसे पसन्द कर सकते हैं?॥ 31-32॥
‘You, Karna and Subalaputra, who, by taking the support of Shakunika, had thought yourself immortal and did not even consider yourself to be a human being, why do you not fight now after committing that great sin? Bharata! Get up and fight with us. How can a brave man like you like to turn his back and run away due to attachment?॥ 31-32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥