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mahabharat 9.31.16-17: संजय कहते हैं- महाराज! भरतनन्दन! भगवान श्रीकृष्ण की यह बात सुनकर उत्तम एवं कठोर व्रत का पालन करने वाले पाण्डुकुमार कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने जल में स्थित आपके महाबली पुत्र से हँसकर कहा- 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.31.16-17 
संजय उवाच
इत्युक्तो वासुदेवेन पाण्डव: संशितव्रत:॥ १६॥
जलस्थं तं महाराज तव पुत्रं महाबलम्।
अभ्यभाषत कौन्तेय: प्रहसन्निव भारत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! भरतनन्दन! भगवान श्रीकृष्ण की यह बात सुनकर उत्तम एवं कठोर व्रत का पालन करने वाले पाण्डुकुमार कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने जल में स्थित आपके महाबली पुत्र से हँसकर कहा- 16-17॥
 
Sanjay says- Maharaj! Bharatnandan! On hearing this from Lord Shri Krishna, Pandukumar Kuntinandan Yudhishthir, who observed a good and strict fast, said laughingly to your mighty son situated in the water - 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)