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mahabharat 9.31.13-14: हे प्रभु! वातापि, इल्वल, त्रिशिरा और सुन्द-उपसुन्द नामक दैत्य भी उनके कौशल से मारे गए। इन्द्र केवल कर्म से ही स्वर्ग का राज्य भोगते हैं ॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  9.31.13-14 
वातापिरिल्वलश्चैव त्रिशिराश्च तथा विभो॥ १३॥
सुन्दोपसुन्दावसुरौ क्रिययैव निषूदितौ।
क्रियाभ्युपायैरिन्द्रेण त्रिदिवं भुज्यते विभो॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वातापि, इल्वल, त्रिशिरा और सुन्द-उपसुन्द नामक दैत्य भी उनके कौशल से मारे गए। इन्द्र केवल कर्म से ही स्वर्ग का राज्य भोगते हैं ॥13-14॥
 
Lord! The demons named Vatapi, Ilval, Trishira and Sunda-Upasunda were also killed due to their skill. Indra enjoys the kingdom of heaven only through active measures. 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)