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mahabharat 9.31.12-13h: नरेश्वर! मैंने पूर्वकाल के महान् राक्षस तारक तथा महाबली विप्रचित्ति को केवल व्यावहारिक उपायों से ही मार डाला था ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  9.31.12-13h 
क्रियाभ्युपायैर्निहतौ मया राजन् पुरातनौ॥ १२॥
तारकश्च महादैत्यो विप्रचित्तिश्च वीर्यवान्।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! मैंने पूर्वकाल के महान् राक्षस तारक तथा महाबली विप्रचित्ति को केवल व्यावहारिक उपायों से ही मार डाला था ॥12 1/2॥
 
Nareshwar! I had killed the great demon Tarak and the mighty Viprachitti of earlier times only through practical measures. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)