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mahabharat 9.31.10: भगवान ने हिरण्यकशिपु का वध भी व्यावहारिक प्रयासों से ही किया था। हे राजन! इसमें कोई संदेह नहीं कि वृत्रासुर का वध भी व्यावहारिक उपायों से ही हुआ था। ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 9.31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 31: पाण्डवोंका द्वैपायनसरोवरपर जाना, वहाँ युधिष्ठिर और श्रीकृष्णकी बातचीत तथा तालाबमें छिपे हुए दुर्योधनके साथ युधिष्ठिरका संवाद  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.31.10 
हिरण्यकशिपुश्चैव क्रिययैव निषूदितौ।
वृत्रश्च निहतो राजन् क्रिययैव न संशय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने हिरण्यकशिपु का वध भी व्यावहारिक प्रयासों से ही किया था। हे राजन! इसमें कोई संदेह नहीं कि वृत्रासुर का वध भी व्यावहारिक उपायों से ही हुआ था। ॥10॥
 
It was through practical efforts that the Lord killed Hiranyakshipu as well. O King! There is no doubt that Vritraasura was also killed through practical means. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)