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mahabharat 9.30.64: माननीय महोदय! बहुत दूर जाने पर उन्हें एक बरगद का पेड़ दिखाई दिया। बहुत थक जाने के कारण वे पेड़ के नीचे बैठ गए और राजा दुर्योधन के बारे में सोचने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  9.30.64 
ते गत्वा दूरमध्वानं न्यग्रोधं प्रेक्ष्य मारिष।
न्यविशन्त भृशं श्रान्ताश्चिन्तयन्तो नृपं प्रति॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय! बहुत दूर जाने पर उन्हें एक बरगद का पेड़ दिखाई दिया। बहुत थक जाने के कारण वे पेड़ के नीचे बैठ गए और राजा दुर्योधन के बारे में सोचने लगे।
 
Honorable Sir! After going a long way, he saw a banyan tree. Being very tired, he sat down under the tree, thinking about King Duryodhan. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)