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mahabharat 9.30.59-60: वे घोर शंखध्वनि और रथ के पहियों की गड़गड़ाहट से पृथ्वी को कंपाते हुए और धूल का महान ढेर लगाते हुए वहाँ आये। युधिष्ठिर की सेना का कोलाहल सुनकर तीन महारथी कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा राजा दुर्योधन से इस प्रकार बोले -॥59-60॥   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  9.30.59-60 
महता शङ्खनादेन रथनेमिस्वनेन च।
ऊर्ध्वं धुन्वन् महारेणुं कम्पयंश्चापि मेदिनीम्॥ ५९॥
यौधिष्ठिरस्य सैन्यस्य श्रुत्वा शब्दं महारथा:।
कृतवर्मा कृपो द्रौणी राजानमिदमब्रुवन्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
वे घोर शंखध्वनि और रथ के पहियों की गड़गड़ाहट से पृथ्वी को कंपाते हुए और धूल का महान ढेर लगाते हुए वहाँ आये। युधिष्ठिर की सेना का कोलाहल सुनकर तीन महारथी कृतवर्मा, कृपाचार्य और अश्वत्थामा राजा दुर्योधन से इस प्रकार बोले -॥59-60॥
 
They came there shaking the earth with the sound of loud conch shells and the rattling of chariot wheels and raising a great heap of dust. Hearing the noise of Yudhishthira's army, the three mighty car-warriors Kritavarma, Krupacharya and Ashvatthama spoke to King Duryodhana in this manner -॥ 59-60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)