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mahabharat 9.30.56: हे प्रभु! नरेन्द्र! राजा दुर्योधन हाथ में गदा लिए जल के अन्दर सो रहे थे। उस समय किसी भी मनुष्य का उन्हें देख पाना कठिन था।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  9.30.56 
सलिलान्तर्गत: शेते दुर्दर्श: कस्यचित् प्रभो।
मानुषस्य मनुष्येन्द्र गदाहस्तो जनाधिप:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! नरेन्द्र! राजा दुर्योधन हाथ में गदा लिए जल के अन्दर सो रहे थे। उस समय किसी भी मनुष्य का उन्हें देख पाना कठिन था।
 
Lord! Narendra! King Duryodhan was sleeping inside the water with a mace in his hand. It was difficult for any person to see him at that time. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)