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mahabharat 9.30.54-55: उसका जल शीतल और निर्मल था। देखने में वह सुन्दर था और दूसरे सागर के समान विशाल था। हे भारत! संयोगवश और अद्भुत विधि से, आपके पुत्र ने माया द्वारा जल को स्थिर करके उसमें विश्राम किया था। 54-55।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  9.30.54-55 
शीतामलजलं हृद्यं द्वितीयमिव सागरम्॥ ५४॥
मायया सलिलं स्तभ्य यत्राभूत् ते स्थित: सुत:।
अत्यद्भुतेन विधिना दैवयोगेन भारत॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
उसका जल शीतल और निर्मल था। देखने में वह सुन्दर था और दूसरे सागर के समान विशाल था। हे भारत! संयोगवश और अद्भुत विधि से, आपके पुत्र ने माया द्वारा जल को स्थिर करके उसमें विश्राम किया था। 54-55।
 
Its water was cool and clear. It was beautiful to look at and was as vast as another ocean. O Bharata! By chance and by a wonderful method, your son was resting inside it, having made the water still by Maya. 54-55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)