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mahabharat 9.30.5-6h: राजन! इधर, धर्मात्मा युधिष्ठिर भी दुर्योधन को मारने की इच्छा से बड़े हर्ष के साथ अपने भाइयों के साथ रणभूमि में विचरण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  9.30.5-6h 
युधिष्ठिरोऽपि धर्मात्मा भ्रातृभि: सहितो रणे॥ ५॥
हृष्ट: पर्यचरद् राजन् दुर्योधनवधेप्सया।
 
 
अनुवाद
राजन! इधर, धर्मात्मा युधिष्ठिर भी दुर्योधन को मारने की इच्छा से बड़े हर्ष के साथ अपने भाइयों के साथ रणभूमि में विचरण कर रहे थे।
 
Rajan! Here, the virtuous Yudhishthir was also wandering in the battlefield along with his brothers with great joy with the desire to kill Duryodhana. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)