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mahabharat 9.30.46: हे प्रजानाथ! तब पाण्डवों और पांचालों की हर्षपूर्ण हंसी की ध्वनि सर्वत्र गूंजने लगी।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  9.30.46 
तत: किलकिलाशब्द: प्रादुरासीद् विशाम्पते।
पाण्डवानां प्रहृष्टानां पञ्चालानां च सर्वश:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! तब पाण्डवों और पांचालों की हर्षपूर्ण हंसी की ध्वनि सर्वत्र गूंजने लगी।
 
Prajanath! Then the sound of the joyous laughter of the Pandavas and the Panchalas began to reverberate everywhere. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)