Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.30.39-40: भरतभूषण! राजन! तत्पश्चात जब पाण्डव लोग उदास होकर बैठे थे, तब उस व्याध ने राजा दुर्योधन को अपनी आँखों से देखा और तुरन्त वहाँ से चला गया तथा बड़े हर्ष के साथ पाण्डव शिविर में पहुँचा। द्वारपालों के रोकने पर भी वह भीमसेन के सामने ही भीतर प्रवेश कर गया। | mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतभूषण! राजन! तत्पश्चात जब पाण्डव लोग उदास होकर बैठे थे, तब उस व्याध ने राजा दुर्योधन को अपनी आँखों से देखा और तुरन्त वहाँ से चला गया तथा बड़े हर्ष के साथ पाण्डव शिविर में पहुँचा। द्वारपालों के रोकने पर भी वह भीमसेन के सामने ही भीतर प्रवेश कर गया।
Bharatbhushan! King! Thereafter when the Pandavas were sitting dejectedly, the hunter saw King Duryodhan with his own eyes and immediately left that place and reached the Pandava camp with great joy. Despite the gatekeepers stopping him, he entered inside in front of Bhimasena.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥