Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.30.35-36: महाराज! आक्रमण करने में कुशल पाण्डवों ने अपना उद्देश्य प्राप्त कर लिया था; दुर्योधन को युद्धभूमि में खड़ा न देखकर उन्होंने उस पापी के छल-कपट का बदला लेने तथा शत्रुता पर विजय पाने की इच्छा से युद्धभूमि में चारों ओर गुप्तचर भेजे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  9.30.35-36 
पाण्डवापि महाराज लब्धलक्ष्या: प्रहारिण:।
अपश्यमाना: समरे दुर्योधनमवस्थितम्॥ ३५॥
निकृतेस्तस्य पापस्य ते पारं गमनेप्सव:।
चारान् सम्प्रेषयामासु: समन्तात् तद्रणाजिरे॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आक्रमण करने में कुशल पाण्डवों ने अपना उद्देश्य प्राप्त कर लिया था; दुर्योधन को युद्धभूमि में खड़ा न देखकर उन्होंने उस पापी के छल-कपट का बदला लेने तथा शत्रुता पर विजय पाने की इच्छा से युद्धभूमि में चारों ओर गुप्तचर भेजे थे।
 
Maharaj! The Pandavas, skilled in attacking, had achieved their objective; not seeing Duryodhan standing in the battlefield, they had sent spies all over the battlefield with the desire to take revenge for the deceit and treachery of that sinner and overcome the enmity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)