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mahabharat 9.30.33: ‘इससे वे बहुत प्रसन्न होंगे और हमें बहुत-सा धन देंगे। फिर हमें इस सूखे मांस को, जो शरीर का रक्त सुखा देता है, व्यर्थ ही ढोकर कष्ट उठाने की क्या आवश्यकता है?’॥33॥   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.30.33 
स नो दास्यति सुप्रीतो धनानि बहुलान्युत।
किं नो मांसेन शुष्केण परिक्लिष्टेन शोषिणा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘इससे वे बहुत प्रसन्न होंगे और हमें बहुत-सा धन देंगे। फिर हमें इस सूखे मांस को, जो शरीर का रक्त सुखा देता है, व्यर्थ ही ढोकर कष्ट उठाने की क्या आवश्यकता है?’॥33॥
 
‘He will be very pleased with this and will give us a lot of money. Then what is the need for us to suffer uselessly by carrying this dried flesh which dries up the blood of the body?’॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)