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mahabharat 9.30.26-27: राजन! कौरव योद्धाओं का मनोभाव जानकर और यह देखकर कि राजा दुर्योधन युद्ध में उत्साहित नहीं है, तथा सलिलराज के साथ उन तीनों का वार्तालाप सुनकर व्याधों ने समझ लिया कि दुर्योधन इसी सरोवर के जल में छिपा हुआ है॥ 26-27॥   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  9.30.26-27 
तांस्तथा समुदीक्ष्याथ कौरवाणां महारथान्।
अयुद्धमनसं चैव राजानं स्थितमम्भसि॥ २६॥
तेषां श्रुत्वा च संवादं राज्ञश्च सलिले सत:।
व्याधाभ्यजानन् राजेन्द्र सलिलस्थं सुयोधनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राजन! कौरव योद्धाओं का मनोभाव जानकर और यह देखकर कि राजा दुर्योधन युद्ध में उत्साहित नहीं है, तथा सलिलराज के साथ उन तीनों का वार्तालाप सुनकर व्याधों ने समझ लिया कि दुर्योधन इसी सरोवर के जल में छिपा हुआ है॥ 26-27॥
 
King! Knowing the attitude of the Kaurava warriors and seeing that king Duryodhana was not enthusiastic about the battle, and hearing the conversation between the three with the king of Salila, the hunters understood that Duryodhana was hiding in the water of this lake.॥ 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)