Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.30.21: यदि इस रात्रि के बीतते ही मैं युद्धभूमि में शत्रुओं का संहार न करूँ, तो मुझे वह सुख प्राप्त नहीं होगा जो श्रेष्ठ पुरुषों को प्राप्त होता है तथा जो यज्ञ करने वालों को प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा स्म यज्ञकृतां प्रीतिमाप्नुयां सज्जनोचिताम्।
यदीमां रजनीं व्युष्टां न हि हन्मि परान् रणे॥ २१॥
अनुवाद
यदि इस रात्रि के बीतते ही मैं युद्धभूमि में शत्रुओं का संहार न करूँ, तो मुझे वह सुख प्राप्त नहीं होगा जो श्रेष्ठ पुरुषों को प्राप्त होता है तथा जो यज्ञ करने वालों को प्राप्त होता है।
If I do not kill the enemies on the battlefield as soon as this night passes, then I will not get the happiness that is worthy of noble men and that is attained by those who perform yajnas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥