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mahabharat 9.30.20: हे राजन! मैं अपने इच्छित कर्मों, दान, सत्य और विजय की शपथ लेकर कहता हूँ कि आज मैं समस्त सोमकों का वध करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  9.30.20 
इष्टापूर्तेन दानेन सत्येन च जपेन च।
शपे राजन् यथा ह्यद्य निहनिष्यामि सोमकान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं अपने इच्छित कर्मों, दान, सत्य और विजय की शपथ लेकर कहता हूँ कि आज मैं समस्त सोमकों का वध करूँगा।
 
O King! I swear by my desired deeds, charity, truth and victory that I shall kill all the Somakas today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)