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mahabharat 9.3.56-57h: अतः तुम अपने पूर्वजों द्वारा पालन किए गए धर्म का परित्याग मत करो। क्षत्रिय के लिए युद्ध से भाग जाने से बढ़कर कोई पाप नहीं है। ॥56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  9.3.56-57h 
पितामहैराचरितं न धर्मं हातुमर्हथ॥ ५६॥
नान्यत् कर्मास्ति पापीय: क्षत्रियस्य पलायनात्।
 
 
अनुवाद
अतः तुम अपने पूर्वजों द्वारा पालन किए गए धर्म का परित्याग मत करो। क्षत्रिय के लिए युद्ध से भाग जाने से बढ़कर कोई पाप नहीं है। ॥56 1/2॥
 
‘Therefore do not abandon the Dharma practised by your forefathers. There is no more sinful act for a Kshatriya than to flee from a battle. ॥ 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)