श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  9.3.5-6 
वणिजो नावि भिन्नायामगाधे विप्लवा इव॥ ५॥
अपारे पारमिच्छन्तो हते द्वीपे किरीटिना।
सूतपुत्रे हते राजन् वित्रस्ता: शरविक्षता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! जैसे विशाल समुद्र को पार करने की इच्छा रखने वाले नाविक व्यापारी अपनी नाव के टूट जाने पर भयभीत हो जाते हैं, उसी प्रकार जब मुकुटधारी अर्जुन ने बाणों से घायल होकर द्वीप के समान विशाल सारथीपुत्र को मार डाला, तब हम सब लोग भयभीत हो गये।
 
King! Just as boatless merchants, wishing to cross the vast ocean, get frightened when their boat gets torn apart, similarly, we all became frightened after the son of a charioteer, who was like an island, was killed by crown-wearing Arjuna, being wounded by arrows.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas