श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  9.3.49-50h 
नातिदूरापयातं च कृतबुद्धि: पलायने॥ ४९॥
दुर्योधन: स्वकं सैन्यमपश्यद् भृशविक्षतम्।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने देखा कि उसकी सेना बुरी तरह घायल होकर युद्धभूमि से भागने का प्रयत्न कर रही है, परन्तु वह अधिक दूर नहीं गई थी ॥49 1/2॥
 
Duryodhana saw that his army was badly wounded and was trying to flee from the battlefield, but it had not gone very far. ॥ 49 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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