श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.3.47 
त एनमभिगर्जन्तं सहिता: समुपाद्रवन्।
नानाशस्त्रसृज: क्रुद्धा भर्त्सयन्तो मुहुर्मुहु:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तब पाण्डव योद्धाओं ने बड़े क्रोध में आकर गर्जना करते हुए दुर्योधन पर आक्रमण किया, उसे बार-बार डाँटा और क्रोधपूर्वक उस पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा की।
 
Then the Pandava warriors, in great fury, attacked the roaring Duryodhana, rebuking him again and again, and angrily showering him with various kinds of weapons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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