श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.3.44 
अन्धकारीकृते लोके शरीभूते महीतले।
दिश: सर्वा महाराज तावका: प्राद्रवन् भयात्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब उस धूल के कारण संसार अंधकार से आच्छादित हो गया और पृथ्वी बाणों से पट गई, तब आपके सैनिक भयभीत होकर सब दिशाओं में भाग गए।
 
Maharaj! When the world was covered in darkness due to that dust and the earth was strewn with arrows, your soldiers fled in all directions out of fear.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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