श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  9.3.42 
सेनावशेषं तं दृष्ट्वा तव पुत्रस्य पाण्डव:।
अवस्थितं सव्यसाची चुक्रोध बलवन्नृप॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! पाण्डुपुत्र सव्यसाची अर्जुन आपके पुत्र की सेना के उस भाग को शेष रह गया और अपने सामने खड़ा हुआ देखकर अत्यन्त कुपित हो गया॥42॥
 
O Lord of men! Arjuna, the son of Pandu, Savyasachi, became extremely enraged upon seeing that portion of your son's army remaining and standing in front of him. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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