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mahabharat 9.3.4-5h: कर्ण के मारे जाने के बाद आपके किसी भी योद्धा में सेना को संगठित रखने का उत्साह नहीं रहा, न ही वे वीरता पर ध्यान केन्द्रित कर सके।   |   mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  9.3.4-5h 
न संधातुमनीकानि न चैवाथ पराक्रमे॥ ४॥
आसीद् बुद्धिर्हते कर्णे तव योधस्य कस्यचित्।
 
 
अनुवाद
कर्ण के मारे जाने के बाद आपके किसी भी योद्धा में सेना को संगठित रखने का उत्साह नहीं रहा, न ही वे वीरता पर ध्यान केन्द्रित कर सके।
 
After Karna was killed, none of your warriors had the enthusiasm to keep the army organized, nor could they concentrate on valor. 4 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)