श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.3.37 
महाधनुर्धर: श्रीमानमित्रगणमर्दन:।
पुत्र: पञ्चालराजस्य धृष्टद्युम्नो महायशा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पांचालराज के पुत्र धृष्टद्युम्न महान धनुर्धर, अत्यन्त यशस्वी, तेजस्वी और शत्रु समूह का संहार करने में समर्थ थे ॥37॥
 
Dhrishtadyumna, the son of Panchala king, was a great archer, very famous, brilliant and capable of killing the enemy group. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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