श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.3.33 
ततो धनंजयो राजन् रथानीकमगाहत।
विश्रुतं त्रिषु लोकेषु गाण्डीवं व्याक्षिपन् धनु:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् अर्जुन अपना त्रिभुवन-विख्यात गाण्डीव धनुष घुमाते हुए आपके सारथि सेना में प्रवेश कर गए॥33॥
 
Rajan! Thereafter, Arjuna entered the army of your charioteers, swinging his tribhuvan-famous Gandiva bow. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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