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श्लोक 9.3.32  |
तस्याश्ववाहान् सुबहूंस्ते निहत्य शितै: शरै:।
तमन्वधावंस्त्वरितास्तत्र युद्धमवर्तत॥ ३२॥ |
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| अनुवाद |
| उन सबने अपने तीखे बाणों से शकुनि के बहुत-से घुड़सवारों को मार डाला और बड़ी तेजी से शकुनि पर आक्रमण कर दिया। फिर उन दोनों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। |
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| All of them killed many of Shakuni's horsemen with their sharp arrows and attacked Shakuni there with great haste. Then a fierce battle broke out between them. |
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