श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.3.32 
तस्याश्ववाहान् सुबहूंस्ते निहत्य शितै: शरै:।
तमन्वधावंस्त्वरितास्तत्र युद्धमवर्तत॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उन सबने अपने तीखे बाणों से शकुनि के बहुत-से घुड़सवारों को मार डाला और बड़ी तेजी से शकुनि पर आक्रमण कर दिया। फिर उन दोनों में भयंकर युद्ध छिड़ गया।
 
All of them killed many of Shakuni's horsemen with their sharp arrows and attacked Shakuni there with great haste. Then a fierce battle broke out between them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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