श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  9.3.30-31 
धनंजयो रथानीकमन्वपद्यत वीर्यवान्॥ ३०॥
माद्रीपुत्रौ च शकुनिं सात्यकिश्च महाबल:।
जवेनाभ्यपतन् हृष्टा घ्नन्तो दौर्योधनं बलम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उधर, वीर अर्जुन ने रथ सेना पर आक्रमण कर दिया। माद्री के पुत्र नकुल, सहदेव तथा पराक्रमी सात्यकि ने दुर्योधन की सेना का संहार करते हुए शकुनि पर बड़े बल से आक्रमण किया।
 
On the other side, the valiant Arjuna attacked the chariot army. Madri's sons Nakula and Sahadeva and the mighty Satyaki, while destroying Duryodhan's army, attacked Shakuni with great force.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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