श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  9.3.27-28h 
आसाद्य भीमसेनं ते संरब्धा युद्धदुर्मदा:॥ २७॥
विनेदु: सहसा दृष्ट्वा भूतग्रामा इवान्तकम्।
 
 
अनुवाद
वे वीर योद्धा क्रोध में भरकर सहसा भीमसेन से भिड़ गए और उसी प्रकार चिल्लाने लगे, जैसे यमराज को देखकर प्राणियों का समूह चिल्लाता है।
 
Filled with rage, those valiant warriors suddenly grappled with Bhimasena and began to cry out in the same manner as a crowd of creatures scream at the sight of Yamaraja. 27 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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