Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.3.26-27h: उस समय क्रोध और क्रोध में भरी हुई पैदल सेना अपने प्राणों और सम्बन्धियों को छोड़कर युद्धस्थल में भीमसेन की ओर ऐसे दौड़ी जैसे पतंगे जलती हुई आग की ओर दौड़ते हैं॥26 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पदातयो हि संरब्धास्त्यक्तजीवितबान्धवा:॥ २६॥
भीममभ्यद्रवन् संख्ये पतङ्गा इव पावकम्।
अनुवाद
उस समय क्रोध और क्रोध में भरी हुई पैदल सेना अपने प्राणों और सम्बन्धियों को छोड़कर युद्धस्थल में भीमसेन की ओर ऐसे दौड़ी जैसे पतंगे जलती हुई आग की ओर दौड़ते हैं॥26 1/2॥
At that time, abandoning their lives and relatives, the infantry filled with rage and fury, ran towards Bhimasena on the battlefield like kites rush towards a burning fire.॥ 26 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥