श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  9.3.24-25h 
न तान् रथस्थो भूमिष्ठान् धर्मापेक्षी वृकोदर:॥ २४॥
योधयामास कौन्तेयो भुजवीर्यमुपाश्रित:।
 
 
अनुवाद
युद्ध के नियमों का पालन करने की इच्छा रखने वाले कुन्तीपुत्र भीमसेन ने पैदल सेना को भूमि पर खड़ा देखकर रथ पर सवार होकर युद्ध करना उचित न समझा। अपने बाहुबल पर भरोसा करके वह पैदल ही उनके साथ युद्ध करने लगा॥24 1/2॥
 
Kunti's son Bhimasena, who wanted to follow the rules of war, did not think it right to fight on his chariot with the infantry standing on the ground. Trusting in his physical strength, he started fighting with them on foot.॥ 24 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas