श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  9.3.23-24h 
अक्रुद्धॺत रणे भीमस्तैर्मृधे प्रत्यवस्थितै:॥ २३॥
सोऽवतीर्य रथात्तूर्णं गदापाणिरयुध्यत।
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने जब अपने सामने खड़े योद्धाओं को युद्धभूमि में लड़ते देखा, तो उन्हें बड़ा क्रोध आया। वे तुरन्त रथ से उतर पड़े और हाथ में गदा लेकर उनसे युद्ध करने लगे।
 
Bhimasena became very angry when he saw the warriors standing in front of him fighting on the battlefield. He immediately got down from the chariot and started fighting with them with his mace in his hand. 23 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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